13. वहां से वह लूज को पहुंचा (जो बेतेल भी कहलाता है), और लूज की दक्खिन अलंग से होते हुए निचले बेथोरोन की दक्खिन ओर के पहाड़ के पास हो अत्रोतद्दार को उतर गया।
14. फिर पश्चिमी सिवाना मुड़के बेथोरोन के साम्हने और उसकी दक्खिन ओर के पहाड़ से होते हुए किर्यतबाल नाम यहूदियों के एक नगर पर निकला (जो किर्यत्यारीम भी कहलाता है); पश्चिम का सिवाना यही ठहरा।
15. फिर दक्खिन अलंग का सिवाना पश्चिम से आरम्भ हो कर किर्यत्यारीम के सिरे से निकलकर नेप्तोह के सोते पर पहुंचा;
16. और उस पहाड़ के सिरे पर उतरा, जो हिन्नोम के पुत्र की तराई के साम्हने और रपाईम नाम तराई की उत्तर ओर है; वहां से वह हिन्नोम की तराई में, अर्थात यबूस की दक्खिन अलंग हो कर एनरोगेल को उतरा;
17. वहां से वह उत्तर की ओर मुड़कर एनशेमेश को निकलकर उस गलीलोत की ओर गया, जो अदुम्मीम की चढ़ाई के साम्हने है, फिर वहां से वह रूबेन के पुत्र बोहन के पत्थर तक उतर गया;
18. वहां से वह उत्तर की ओर जा कर अराबा के साम्हने के पहाड़ की अलंग से होते हुए अराबा को उतरा;
19. वहां से वह सिवाना बेथोग्ला की उत्तर अलंग से जा कर खारे ताल की उत्तर ओर के कोल में यरदन के मुहाने पर निकला; दक्खिन का सिवाना यही ठहरा।
20. और पूर्व की ओर का सिवाना यरदन ही ठहरा। बिन्यामीनियों का भाग, चारों ओर के सिवानों सहित, उनके कुलों के अनुसार, यही ठहरा।
21. और बिन्यामीनियों के गोत्र को उनके कुलों के अनुसार ये नगर मिले, अर्थात यरीहो, बेथोग्ला, एमेक्कसीस,
22. बेतराबा, समारैम, बेतेल,
23. अव्वीम, पारा, ओप्रा,
24. कपरम्मोनी, ओप्नी और गेबा; ये बारह नगर और इनके गांव मिले।
25. फिर गिबोन, रामा, बेरोत,
26. मिस्पे, कपीरा, मोसा,