3. तब तेल की यह कुप्पी ले कर तेल को उसके सिर पर यह कह कर डालना, यहोवा यों कहता है, कि मैं इस्राएल का राजा होने के लिये तेरा अभिषेक कर देता हूँ। तब द्वार खोल कर भागना, विलम्ब न करना।
4. तब वह जवान भविष्यद्वक्ता गिलाद के रामोत को गया।
5. वहां पहुंचकर उसने क्या देखा, कि सेनापति बैठे हए हैं; तब उसने कहा, हे सेनापति, मुझे तुझ से कुछ कहना है। येहू ने पूछा, हम सभों में किस से? उसने कहा हे सेनापति, तुझी से!
6. तब वह उठ कर घर में गया; और उसने यह कह कर उसके सिर पर तेल डाला कि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, मैं अपनी प्रजा इस्राएल पर राजा होने के लिये तेरा अभिषेक कर देता हूँ।
7. तो तू अपने स्वामी अहाब के घराने को मार डालना, जिस से मुझे अपने दास भविष्यद्वक्ताओं के वरन अपने सब दासों के खून का जो ईज़ेबेल ने बहाया, पलटा मिले।
8. क्योंकि अहाब का समस्त घराना नाश हो जाएगा, और मैं अहाब के वंश के हर एक लड़के को और इस्राएल में के क्या बन्धुए, क्या स्वाधीन, हर एक को नाश कर डालूंगा।
9. और मैं अहाब का घराना नबात के पुत्र यारोबाम का सा, और अहिय्याह के पुत्र बाशा का सा कर दूंगा।
10. और ईज़ेबेल को यिज्रैल की भूमि में कुत्ते खाएंगे, और उसको मिट्टी देने वाला कोई न होगा। तब वह द्वार खोल कर भाग गया।
11. तब येहू अपने स्वामी के कर्मचारियों के पास निकल आया, और एक ने उस से पूछा, क्या कुशल है, वह बावला क्यों तेरे पास आया था? उसने उन से कहा, तुम को मालूम होगा कि वह कौन है और उस से क्या बातचीत हुई।
12. उन्होंने कहा झूठ है, हमें बता दे। उसने कहा, उसने मुझ से कहा तो बहुत, परन्तु मतलब यह है कि यहोवा यों कहता है कि मैं इस्राएल का राजा होने के लिये तेरा अभिषेक कर देता हूँ।
13. तब उन्होंने झट अपना अपना वस्त्र उतार कर उसके नीचे सीढ़ी ही पर बिछाया, और नरसिंगे फूंक कर कहने लगे, येहू राजा है।